Tuesday, May 21, 2019

अदालतों के लिए गर्मियों की छुट्टियां क्यों?

गर्मियों की छुट्टियों का मज़ा कौन लेते हैं? इस सवाल के जवाब में आप तुरंत कहेंगे कि स्कूल और कॉलेज. लेकिन इनके साथ एक नाम और जोड़ दीजिए देश के न्यायालय.

अदालतों में छुट्टियों का कैलेंडर देखने का बाद आपका मन भी करने लगा होगा कि काश हम भी इन अदालतों के कर्मचारी होते, तो इतनी सारी छुट्टियां मिल जातीं.

साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट में 193 दिन काम हुआ. जबकि देश की विभिन्न हाईकोर्ट औसतन 210 दिन खुली रहीं. इसके अलावा अन्य अधीनस्त अदालतें 254 दिनों तक काम करती रहीं.

लेकिन इन अदालतों से परे ज़िलों और तालुका स्तर की आपराधिक मामलों की अदालतें छुट्टी वाले दिनों में भी काम करती रहीं.

हालांकि, छुट्टी वाले दिनों में काम के दौरान किसी भी पुराने मामले के लिए नई तारीखों की घोषणा नहीं होती और सिर्फ ज़मानत याचिकाओं और अन्य ज़रूरी मामलों का निपटारा किया जाता है.

अदालतों के अलावा दूसरा कोई भी सरकारी विभाग इतने दिनों तक छुट्टियों पर नहीं जाता. यही वजह है कि अदालतों की ये छुट्टियां हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती हैं. कई लोगों का मामना है कि अदालतों की इन छुट्टियों की वजह से ही आम जनता को न्याय मिलने में देरी होती है.

साल 2018 के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय अदालतों में 3.3 करोड़ से अधिक मामले अभी विचाराधीन हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि छुट्टियों के चलते यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है.

लेकिन सवाल उठता है कि आखिर अदालतों में इतनी छुट्टियां मिलती क्यों हैं और छुट्टियों का यह नियम आया कहां से?

कई लोगों का कहना है कि अदालतों में गर्मियों की छुट्टियों का नियम अंग्रेज़ों ने अपनी सुविधा के अनुसार बनाया था.

महाराष्ट्र के एक पूर्व महाधिवक्ता श्रीहरि अनेय इन छुट्टियों की बहुत ही कड़े शब्दों में निंदा करते हैं.

वो कहते हैं, ''अंग्रेज़ों ने यह व्यवस्था बनाई. गर्मियों के दिनों में अंग्रेज जज किसी पहाड़ी इलाके में या फिर इंग्लैंड चले जाते थे. आज़ादी के बाद भी हम उनके इस नियम को लागू कर रहे हैं. मेरे विचार से अदालतों के पास बहुत ज़्यादा छुट्टियां हैं. दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं जहां कि अदालतें इतनी लंबी छुट्टियों पर जाती हैं.''

वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता असीम सरोडे को लगता है कि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए जजों का गर्मियों की छुट्टियों पर जाना उचित नहीं है.

वे कहते हैं, ''मैं यह नहीं कहता कि अदालतों में छुट्टियां होनी ही नहीं चाहिए. लेकिन छुट्टियों के चलते अदालतों का काम पूरी तरह ठप्प नहीं होना चाहिए. इसके स्थान पर कुछ न कुछ वैकल्पिक व्यवस्था ज़रूर होनी चाहिए. कई बार ऐसे मामले आते हैं जिसमें तुरंत न्याय की आवश्यकता होती है.''

''कई बार मानवाधिकार से जुड़े मामलों में तुरंत न्याय की गुंजाइश होती है लेकिन अदालत छुट्टी पर चल रही होती है, ऐसे हालात में यह साबित करना होता है कि हमें तुरंत न्याय क्यों चाहिए. यह बहुत बड़ा अन्याय है. इसीलिए अदालतों में जजों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए. सभी जजों को छुट्टी पर भेजने की जगह इसमें रोटेशन नीति अपनानी चाहिए.''

असीम सरोडे पुराने नियमों और व्यवस्था को ढोते रहने का विरोध करते हैं और नई व्यवस्था लागू करने की बात करते हैं.

वो कहते हैं, ''दरअसल अदालतों में मिलने वाली यह छुट्टियां अंग्रेज़ों की गुलामी का प्रतीक हैं. हम अभी तक इनसे बाहर नहीं निकल सके हैं. हम विकासशील देश हैं. हमें और तरक्की की ज़रूरत है. और इसके लिए हमें और अधिक काम करने की ज़रूरत है. लेकिन हम तो छुट्टियां ले रहे हैं.''

बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील प्रवर्तक पाठक कहते हैं, ''न्यायव्यवस्था के भीतर वकील और जज बहुत अधिक दबाव में काम कर रहे हैं. इस दबाव को कम करने के लिए छुट्टियां बहुत आवश्यक हैं.''

वो साथ ही कहते हैं, ''अदालत में रहना जज की नौकरी का हिस्सा है. लेकिन जब वो कोर्ट में नहीं रहते तब भी वो कोई रिसर्च, किसी ऑर्डर का लेखन, दूसरे आदेश को पढ़ना और क़ानून को लगातार पढ़ते रहने का काम करते रहते हैं. इसलिए उन्हें लंबी छुट्टियों की ज़रूरत महसूस होती है.''

मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस हरि पारानथमन मानते हैं कि कोर्ट से दूसरे सरकारी विभागों की छुट्टियों की तुलना करना ठीक नहीं है.

वो कहते हैं, "ये एक अलग तरह का काम होता है. ये सवाल उठाना ग़लत है कि जब किसी अन्य विभाग में छुट्टियां नहीं होती हैं तो कोर्ट में क्यों होनी चाहिए"

लेकिन एक सवाल अभी भी मौजूद है कि क्या अदालतों में करोड़ों मामले कोर्ट की छुट्टियों की वजह से लंबित हैं.

जस्टिस पारानथमन कहते हैं, "छुट्टियां कोई मुद्दा नहीं हैं. अदालतों में मामले लंबित हैं क्योंकि किसी तरह की जवाबदेही नहीं है. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट किसी के प्रति जवाबदेह नहीं हैं. निचली अदालतों में अगर कोई फैसला दो साल में नहीं आता है तो हाई कोर्ट उनसे देरी को लेकर सवाल करती हैं. लेकिन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से ये सवाल पूछने वाला कोई नहीं है. ऐसे में कानूनी मामले 20 साल तक चलते रहते हैं."

Tuesday, May 14, 2019

菲律宾中期选举:年初那碗豆花和现在的“反中情绪”

“中国人在大厦内抽烟,不遵守规定。”年轻的菲律宾选民提欧西欧(Tiosejo)告诉BBC中文,他所住的大厦内,有三十几名中国房客,常在公共空间抽烟,遭到其他住户抱怨。

提欧西欧道出部分菲律宾人的心声,从去年底开始,在菲律宾陆续发生多起中国人被指不文明的行为,像是去年11月,有网友拍下一名赤膊中国男子站在商场收银员前的照片,并称中国人插队后还脱下衬衫,行为荒唐。

今年一月,也有菲律宾网友拍下中国女性游客与一名女孩在马尼拉购物商场MOA旁的广场便溺,遭到批评。而就在几周后,今年二月,又发生中国女留学生在电车站向警察泼洒豆花事件,当时挑起民众的“反中情绪”,菲律宾副总统莱妮·罗布雷多(Leni Robredo)更表示,该女学生行为“侮辱所有菲律宾人”。

房子和工作
菲律宾政治观察人士法尔西斯(Jesus Nicardo Falcis III)分析,“反中情绪”与菲律宾的民族主义有关,在南海主权争议上,菲律宾人认为中国侵犯他们的主权,且过去常有菲律宾渔船遭到中国海防人员的骚扰,这都让菲律宾人对中国印象不好。

而随着菲律宾总统杜特尔特上任后,采取了亲中立场,中菲关系升温,也使中国投资和大批中国劳工和游客涌入菲律宾。菲律宾驻中国大使罗玛纳(Chito Sta. Romana)四月指出,2018年约有125万中国游客赴菲律宾,比2017年增加29.62%。

菲律宾机场入境处提领行李的地方有许多写有中文的大幅赌场宣传海报,BBC中文记者实地走访首都马尼拉的马卡蒂(Makati)和帕赛(Pasay )以及周边城市拉斯皮纳斯市(Las Piñas),在路上皆可听到普通话或中国方言。

据官方统计,2018年约有3.5万中国人获得工作签证,约20.2万人获得最长6个月的特别工作许可,因此约有近24万中国人在菲律宾工作,其中71%是从事面向中国人的赌场相关工作。

法尔西斯对BBC中文解释,因为有南海主权争议,再加上中国人数攀升,就很容易让菲律宾人感受到威胁。他说:“看到中国人,就会勾起被侵犯的感觉。”同时他也指出,许多中国人在菲律宾非法工作也是原因之一。

菲律宾移民局今年2月公布数据显示,2018年因非法逗留菲律宾而逮捕的533名外国人中,中国人就占74%共393人,其次是52名韩国人,12名美国人。

提欧西欧所居住的大厦位于马尼拉的曼达卢永(Mandaluyong),当地媒体今年四月曾报道,该区有许多土地开发商将整层楼卖给中国投资客,他们常会在预售屋阶段就付完押金。

当地媒体转述房地产专员表示,有些已被菲律宾买主预定的房子,会被转卖给中国投资客,因为许多当地买主都是在海外工作的菲律宾人,对开发商而言,资金丰富的中国投资客可以更快完成交易。

菲律宾利基(Leechiu)房地产顾问公司表示,中国已成为马尼拉公寓单位的最大买家, 预计这种强劲需求会持续。菲律宾大学政治系助理教授吴安平(Jan Robert R. Go)向BBC中文分析,因为大批中国人有意在菲律宾买房,开发商会提高房价,拉高菲律宾的贫富差距,使当地人更难买房,也是反中情绪的原因之一。

暂停营业的美食城
另外,不停冒出的大型中国美食广场也引发歧视菲律宾人的争议。中期选举前,拉斯皮纳斯市(Las Piñas)一间有30个摊位的中国美食城,遭菲律宾工商部突击检查发现,招牌、菜单只有中文,只接待中国顾客。另外,因多个摊位没有营业许可和税务局的正式收据及未符合卫生法规,而遭无限期关闭。

BBC中文5月13日再次走访该美食城,发现外头设置铁皮围篱,大门紧锁且保全森严,禁止任何人进入。但门上却挂着布条,以中英文标示“即将开幕”。据当地媒体报道,在下令该美食城暂停营业后,菲律宾工商部正急忙发出一项行政命令,要求所有商家的外文招牌都必须翻译为英文。

事实上,距离这间已歇业的美食城约100米处有另一间只卖中式食物的美食城,里面约有七间中式餐厅。BBC中文发现菜单只有中文。许多店员为中国籍员工,不谙英文及菲律宾语,明显仅服务中国人。

5月13日晚间6时,有近十名中国人在场用餐。一名台湾人向BBC中文透露,该美食城附近,有多间线上博弈公司,员工有上千名中国人,他们通常会在午夜下班后到这里用餐。

菲律宾当局已开始针对被控只服务中国人的中资餐馆或企业展开调查。参议员皮门特尔三世(Aquilino “Koko” Pimentel III)曾表示,“客户只限中国人,是歧视行为”,并称他们将因违反宪法而被勒令关闭。

事实上,距离拉斯皮纳斯市(Las Piñas)约20公里的商业金融中心马卡蒂市,如今中国餐厅林立,更有许多住有上千名中国人的大厦,宛如一座“新中国城”。

马卡蒂市某大厦的菲律宾籍保安向BBC中文透露,25楼高的大楼约有近千个套房,近九成都是中国住户。他说:“这些中国人不会说英文,我们很少交谈。”

该大厦低楼层有中式火锅店、中国超市、美容美发和饮料店,大部分的招牌皆为简体中文,并没有英文翻译,中国籍员工也不会英文。

不过,并非所有菲律宾人都认为这是歧视。住在附近的居民表示,大量中国人涌入是从这几年开始,但并未对此感到反感。居民卡斯提悠(Castillo)说:“我很喜欢他们,他们在菲律宾消费,也促进国家经济。”卡斯提悠表示,他和中国人可以一起生活,大家都要赚钱,不会有负面观感。

菲律宾政治观察人士法尔西斯(Jesus Nicardo Falcis III)对中国人涌入菲律宾表示忧虑。他说,许多证据显示,中国人在从事菲律宾人可以做的工作。

他对BBC中文说:“很多中国工人当建筑工,抢走了原本属于菲律宾人的工作。”他认为,政府针对外国人入境目地的的审核,应该更严谨。

工会组织菲劳联也对私人建筑项目雇用外国工人表示担忧,认为这意味菲律宾人在自己土地上失去工作。菲劳联发言人陈胡赛说:“他们很明显是在做菲律宾人能做的普通工作。”

台湾正修科技大学教授戴万平分析称,许多当地中国投资的赌场雇用大量中国员工接待中国人,菲律宾人会因为无法进入这些中国企业工作,心生不满。

今年1月,菲律宾宣布将不再为建筑工人、服务员、收银员和门卫等蓝领工作发放特别工作许可证。

Thursday, May 9, 2019

中国科技产业降温:市场饱和以及钱太多?

像阿里巴巴、腾讯这样的大公司,以及百度这样的搜索引擎公司,都对内裁减了职位。

根据求职网站猎聘网说,每五家中国科技公司当中就有一家有计划裁员。

“而且我觉得这种增长放缓还会继续,”刘林说。他曾经经营过一家初创科技公司,还在上海、深圳和南京举办过Slush创业投资大会。

不过,据国际货币基金组织(IMF)预计,在过去15年中的六年都有两位数增长的中国经济,在2019年的增幅将下降到6.3%。

这个数字仍然是全世界平均增幅的两倍,但却是中国自1990年以来最慢的增长。

而刘林说,中国号称占世界三分之一的“独角兽公司”——指估值达10亿美元(7.69亿英镑)以上的初创企业——在经济和科技产业都在降温的情势下,正在筹备一场“策略性的重组”。

“令一切完全疯掉的因素是钱太多,”上海一家初创企业加速器中国加速(Chinaccelerator)的董事总经理宾威廉(William Bao Bean)说。

他表示,为了推动经济增长,有大量的资金推力来自政府部门和国库。

这种推力现在已经放缓了。

宾威廉说:“过去,你可能是两个人碰一下,谈笑间就得到300万(投资)。现在你要得到300万,可能是两个碰一下,笑一下,再开六个星期的会。”

共享单车的竞争对手摩拜(Mobike)和Ofo小黄车为了争夺市场份额,去年就在一场残酷的对决中烧光了投资人的钱。

这一块市场现在就踩了刹车。

“现在见到这些单车绕开走的人肯定比骑这些车的人要多得多,”格莱戈里·普鲁德霍默(Gregory Prudhommeaux)说。他在2005年从法国搬到中国,与多家上海初创企业有过合作。

12月,在它未能支付供应商钱款之后,北京一所法院将这家公司及其首席执行官戴威列入了黑名单。

2018年,摩拜单车则损失了46亿人民币,而香港券商中国通海证券(China Tonghai Securities)指,摩拜在2021年之前都不会盈利。

上月,摩拜在北京地区悄悄地将租车金融提高了一倍,现在你付一元租车的时间从过去的半小时变成了15分钟。

两年前,像宜人贷、微贷网这样的P2P网络借贷平台在中国有6200个,是一个膨胀中的泡沫。

不过据上海盈灿咨询公司统计,这些平台在之后有80%已经关闭或者面临重大困难。

这样做的其中一个结果就是大家都开始勒紧裤头。在上海研究中国科技行业的澳大利亚人迈克尔·诺里斯(Michael Norris)说,一些公司可能开始撤掉办公室里的咖啡机,以及不再允许员工在9点后打车回家。

普鲁德霍默也说:“酒吧和餐厅的生意也开始沉下来,人们在外面吃饭花的钱变少了。”

科技公司对员工的要求也更苛刻了,于是就有了对越来越普遍的“996工作制”的抱怨——很多科技公司员工的工作时间经常是上午9点到晚上9点,一周工作六天,成为常态。

诺里斯表示,对于企业来说,“站在顶端轻易得到增长的那种优势感已经消失了”。

其中一个原因,中国市场饱和程度在加大。

这里的上网人群只占总人口的56%,而去年成为亚洲第一家5000亿美元公司的互联网巨头腾讯称,这个比例包括了大部分有网购行为的人口。

Monday, May 6, 2019

台湾国安指责中国“同路媒体”为何引发担忧

台湾国家安全局5月2日称,中国通过在台湾的“同路媒体”,以特定报导内容分化台湾,但他并未公布媒体名单,认为没必要。学者认为,应该公布名单才不会造成社会忧虑,而且在遏止中国干预台湾新闻及打击假新闻上,台湾还有很大的进步空间。

“同路媒体”名单?
台湾国安局副局长陈文凡指出,部分台湾媒体的宣传内容、报导方式、途径及口吻,与中国对台的威胁言论相呼应,这当中涵盖电子、平面媒体及网红等。

该局在业务报告中提及,中国直接对在台的大陆媒体或“同路媒体”提供特定报导内容及方向,散播分化台湾民众向心力的争议讯息,导引其他媒体协力跟风报导。陈文凡5月2日在台湾立法院接受立法委员质询时说:“同路媒体问题确实存在,不需怀疑。”

台湾民进党立委罗致政问他,听闻有媒体在社论刊登前要先给北京看过,有无此事。陈文凡回应:“有听过这种传闻,最近也确实掌握到相关情资。”这是台湾当局罕见证实这一传闻。

然而,当立委追问陈文凡“同路媒体”名单时,陈文凡则表示,名单国安局已将有所掌握,但涉及许多考量,必要时会考虑公布。这一做法引发一些台湾立委不满。

台湾时代力量立委徐永明透过脸书,要求台湾国安局说清楚谁是中国在台的同路媒体。他指出,国安局引用外国研究资料表示,台湾受外国假讯息攻击程度是世界第一,但国安局在报告中只指出《中国台湾网》、《中国评论新闻》等中国媒体散播争议讯息,至于哪些在台湾媒体是中共同路人却未点明。他表示:“总不能要民众自行揣测吧?”

国民党立委吕玉玲批评国安局创造新名词,若不公布名单,“国安局自己就是假消息”。传播学者也认为,政府应该告诉大众是哪些媒体散播争议讯息带风向。台湾中正大学传播系副教授管中祥对BBC中文表示:“国安局必须拿出确实证据及名单,若不清不楚很容易造成恐慌和不安。”

管中祥说:“如果已经违反国家安全法规或两岸关系条例,就应该依法处分。”他强调,若有新闻自由的顾虑,也可以有提醒或公告。

台湾立委罗致政接受BBC中文采访时指出,中国会直接透过各种方式购卖台湾网路媒体,影响言论,也会间接透过台商购买台湾媒体或媒体广告。他也提及,有些人会为了媒体或自身利益,自我审查,又或主动向中国示好,迎合中国的宣传口径。

他举例,台湾有部分媒体因为政治立场问题不能派记者到大陆驻点。这种担心可能会导致媒体的自我审查。

不过,无国界记者组织东亚办事处执行长艾玮昂(Cédric Alviani)对BBC中文指出,台湾政府过去也曾经以打击假新闻名义,禁止中国记者采访或删除他们认为的不实资讯,这种压制性作法,反而拉近了和中国的距离。

他说:“若你不准中国记者入境,那未来会不会也禁止立场亲中的美国记者到台湾采访?”

过去,中国资金进入台湾新闻媒体的传闻不断,台湾法务部曾指出,台湾是民主自由国家,不会特别立法管制媒体经营,主管机关可依法决定是否让中资投资媒体。

管中祥指出,中国可能透过任何方式影响台湾媒体。因为台湾对外资态度开放,投资广电媒体外资审查非常宽松,若没有追查外资背后的股份或间接投资,后果会很严重。

台湾通讯传播委员会5月1日通过媒体多元维护与垄断防制法草案增订条文,未来新闻频道持股10%以上大股东,间接投资其他行业的动态,以及新闻频道广告收入来源,都必须定期揭露供外界参考,违法者处新台币10万至100万罚款(2.1万至21万人民币)。

至于中资付费刊登广告是否合法?根据两岸关系条例第三十四条规定,中国企业虽可在台湾从事广告之播映、刊登,但不得有“为中共从事具政治性目的之宣传”、“违背现行大陆政策或政府法令”、“妨害公序良俗”之行为。

新闻自由
艾玮昂5月3日在香港岭南大学举行的“世界新闻自由日座谈会”上表示,中国政府正影响着全球媒体。他举例,在加拿大和欧洲等国,若记者报导中国不喜欢的新闻,中国大使就会抨击该名记者。

他向BBC中文表示,中国政府现在会间接或直接控制海外华文媒体,像是邀请发展中国家的记者到北京受训,就是要影响他们对于大陆的报导。他说:“中国是有计划性要试着透过海外媒体,改变它的形象,并向各国传播中国式独裁主义模式。

他说,如果各国政府都能控制媒体,那中国就不需要再跟海外媒体打交道,透过该国政府就能控制言论。

总部在法国的国际“无国界记者组织(RSF)”4 月中公布2019 年全球新闻自由指数,去年为亚洲新闻自由度第一的台湾,今年丢了冠军宝座,在180个国家和地区中,排名第42,输给第43名的南韩。香港则排名第73,较去年下跌3位;中国亦下跌一位至177,排名世界倒数第4位。

无国界记者认为,台湾及香港的新闻自由都受到中国因素影响,香港主流传统媒体早已遵守北京命令。

Tuesday, April 16, 2019

四川页岩气开采:“水力压裂”下小地震频发引公众担忧

地震对于中国四川来说并不罕见,但近两年来发生在该省南部的一系列地震却让当地人忧心忡忡,他们担心与中国正蓬勃开展的页岩气开采有关。

一项近期发表在美国地震学会期刊的研究似乎为这种说法提供了最新证据。该研究认为,数月前发生在四川南部兴文县和珙县的两次破坏性地震,均由水力压裂作业所引发。造成18人受伤的

水力压裂作业是开采页岩气的重要技术,过去十年间为美国带来了天然气和石油生产革命,依赖天然气进口的中国近年来也将其视为“救命稻草”。

但学者向BBC中文表示,由于中国更为复杂的地质构造,该技术面临更大的争议和难度。今年2月,在附近地区荣县的另一次频繁地震后,愤怒的村民一度包围县政府进行抗议。

这项本月初发表在美国地震学会期刊《地震研究快报》(Seismological Research Letters)的报告称,有多方面的“证据链条”表明,去年12月和今年1月发生在四川兴文县的5.7级和发生在珙县的5.3级地震,“可能”是由附近的水力压裂作业诱发。

据中国媒体报道,这两次地震共造成18人受伤,另有多处民房遭严重破坏。

这份研究报告引用日本地质调查所雷兴林博士和他的合作者称,他们确定了地震的震源位置,发现它们相对较浅,符合(外力)诱发地震的可能发生深度,两次地震也在时间和空间上与附近的水平井簇的压裂紧密相关。

这份发表在SRL的最新研究的依据还包括:统计分析显示,地震本身的余震活动很少,这也与典型的诱发地震的特征一致。他们(雷兴林博士和他的合作者)通过计算表明,水力压裂的高压注水所产生的岩石孔隙超压足以激活附近的已有断层。

但《地震研究快报》的报告也指出,他们没有更精确的压裂数据来进一步理解注水与地震活动之间的关系。

地处四川盆地南部的兴文县和珙县均属于四川宜宾市管辖,它们在数年前被纳入“长宁-威远国家级页岩气综合利用示范区”,境内均有中国国有能源巨头中国石油下属的页岩气开采项目。

此次公布的研究显然只是四川南部一系列地震中规模较大的两次。根据中国地震台网记录,自2018年以来,发生在川南的内江、自贡、泸州和宜宾四个城市辖区内被监测到的地震便有50余次。

今年2月24日,自贡境内的荣县发生多次地震,造成2人死亡,12人受伤。地震后不久,数千名愤怒的村民便聚集到荣县政府大楼外抗议。荣县政府随后宣布暂停当地15个页岩气平台的水力压裂作业。

“地震已经成为这片的日常。有时候一天都能有两三次震动。只要人是坐着或躺在床上,都会有明显感觉,”家住内江市资中县宋家镇的罗歆(化名)对BBC中文说。她的家离荣县县城约60公里,附近也有三处正热火朝天进行的页岩气项目。

“我们是经历过汶川和芦山地震的,但之前从来没有过这种小地震,就这几年小震特别多,”罗歆说。

在四川山峦起伏的田野和农田间,数以百计高高耸立的钻井平台正在运转。要获取页岩气,需要将化学液体注入地下,用水压将岩石层压裂,从而释放出其中的天然气,这便是水力压裂法。

数十年来,这种方法在美国的普及使该国能源供给大幅增加,由此带来的海量页岩气在拉低北美气价的同时也让美国成为天然气净出口国,因此被称为“页岩气革命”。

पश्चिम बंगाल के गोरखालैंड पर भारी है विकास

पहाड़ियों की रानी के नाम से मशहूर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की संसदीय सीट के लिए होने वाले चुनाव में लगभग तीन दशकों बाद पहली बार गोरखालैंड की बजाय विकास का मुद्दा हावी है.

तृणमूल कांग्रेस कभी इस सीट को नहीं जीत सकी है. बीजेपी ने भी पिछली बार जीते एस.एस.आहलुवालिया की जगह इस बार राजू सिंह बिष्ट को अपना उम्मीदवार बनाया है.

इस सीट के लिए दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होना है.

इलाके में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. जिस गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के एक इशारे पर इलाके में किसी भी उम्मीदवार की किस्मत तय होती थी, वह अब खुद ही दो गुटों में बंटा हुआ है.

मोर्चा का विमल गुरुंग वाला गुट बीजेपी के साथ है तो विनय तमांग वाला गुट ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ.

गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) ने भी बीजेपी को ही समर्थन देने का एलान किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा ममता और अमित शाह भी इस इलाके में चुनावी रैलियां कर चुके हैं.

अस्सी के दशक के उत्तरार्ध से इस इलाके में होने वाले तमाम चुनावों में अलग गोरखालैंड का मुद्दा ही हावी रहता था. पहले सुभाष घीसिंग की अगुवाई वाला गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) यह मुद्दा उठाता रहता था, उसके बाद विमल गुरुंग के नेतृत्व वाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा भी इसी मुद्दे पर अपना समर्थन तय करता था.

इसी वजह से मोर्चा ने पिछले दो चुनावों में भाजपा के क्रमशः जसवंत सिंह और एस.ए.आहलुवालिया को समर्थन देकर उनको यहां जिताया था. लेकिन अब खुद यह मोर्चा ही दो-फाड़ हो चुका है. गोरखा नेता विमल गुरुंग साल 2017 में हुए हिंसक आंदोलन के बाद से ही भूमिगत हैं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बार गोरखा मोर्चा विधायक अमर सिंह राई को अपना उम्मीदवार बनाया है. लेकिन बीजेपी ने आहलुवालिया की जगह 33 साल के एक कारोबारी राजू सिंह बिष्ट को मैदान में उतारा है.

मूल रूप से मणिपुर के रहने वाले राजू का दिल्ली में कारोबार है. गोरखा मोर्चा के विमल गुरुंग गुट के अलावा जीएनएलएफ ने भी उनके समर्थन का एलान किया है.

इसी वजह से ममता इलाके में अपने दौरे के दौरान स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठा चुकी हैं. इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है और दोनों दलों के उम्मीदवार उसी गोरखा तबके से हैं जो यहां निर्णायक हैं.

कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता शंकर मालाकार मैदान में हैं तो सीपीएम ने अपने पूर्व सांसद सुमन पाठक को उम्मीदवार बनाया है.

यहां इलाके के सबसे बड़े राजनीतिक दल ने जिसकी पीठ पर हाथ रख दिया उसकी जीत सौ फीसदी तय हो जाती है.

गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के जमाने में उसके तत्कालीन प्रमुख सुभाष घीसिंग के समर्थन से इंद्रजीत खुल्लर जीतते रहे थे. उसके बाद इलाके में सत्ता बदली और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा प्रमुख विमल गुरुंग के समर्थन से पहले जसवंत सिंह जीते और उसके बाद वर्ष 2014 में एस.एस. अहलुवालिया.

तृणमूल उम्मीदवार अमर सिंह कहते हैं, "विकास ही हमारा मुख्य मुद्दा है. बीते एक दशक से भी लंबे अरसे से इलाके में विकास का काम ठप है. बीजेपी सांसदों ने पहाड़ियों के विकास की दिशा में कोई पहल तक नहीं की है."

तृणणूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री गौतम देब कहते हैं, "अब अलग राज्य के मुद्दे को अलग रख कर विकास पर ध्यान देना जरूरी है. स्थानीय लोग भी अब इस बात को समझने लगे हैं."

बीजेपी के दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष मनोज दीवान कहते हैं, "हमारे लिए अलग राज्य कोई मुद्दा नहीं है. हम इस पर्वतीय इलाके की समस्या के स्थायी राजनीतिक समाधान और यहां लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ रहे हैं."

मोर्चा के विमल गुरुंग गुट के कार्यकारी अध्यक्ष लोकसांग लामा कहते हैं, "इन चुनावों से साबित हो जाएगा कि पहाड़ियों का शीर्ष नेता कौन है. स्थानीय लोग गुरुंग के साथ हैं."

बीजेपी उम्मीदवार राजू सिंह मानते हैं कि लोग अबकी पहाड़ियों में लोकतंत्र की बहाली के लिए वोट देंगे. वर्ष 2017 के गोरखालैंड आंदोलन के दौरान तृणणूल कांग्रेस के लोगों ने पुलिस और प्रशासन के साथ मिल कर जो अत्याचार किए हैं, उसे लोग अब तक नहीं भूल सके हैं.

वह कहते हैं कि दार्जिलिंग की समस्या का स्थायी राजनीतिक समाधान जरूरी है. लेकिन राजू सिंह अलग गोरखालैंड के मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करते.

दूसरी ओर सीपीएम उम्मीदवार और राज्यसभा के पूर्व सांसद सुमन पाठक कहते हैं, "इलाके के लोग बीजेपी और तृममूल कांग्रेस के झूठे वादों से आजिज़ आ चुके हैं. अबकी लोग एक बार फिर सीपीएम पर ही भरोसा जताएंगे."

दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से तीन पर्वतीय इलाके में हैं और बाकी चार मैदानी इलाकों में. मैदानी इलाकों की सीटों में से दो कांग्रेस के कब्जे में हैं और एक-एक सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस के.

पर्वतीय इलाके की सीटों पर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का ही कब्जा है. पर्वतीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे गोरखा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष कल्याण दीवान कहते हैं, "यह दशकों बाद पहला मौका है जब न तो कोई राजनीतिक दल गोरखालैंड की बात कर रहा है और न ही स्थानीय लोग इसकी चर्चा कर रहे हैं."

इस संसदीय क्षेत्र में उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला पर्वतीय इलाके के वोटर ही करते रहे हैं. लगभग 16 लाख वोटरों में से सात लाख तीनों पर्वतीय विधानसभा क्षेत्रों में हैं. यहां वही जीतता है जिसे इलाके पर पकड़ रखने वाली पार्टी समर्थन देती है.

पहले जीएनएलएफ वह पार्टी थी और बाद में गोरखा मोर्चा ने उसकी जगह ले ली. लेकिन अबकी वह गोरखा मोर्चा भी दो गुटों में बंटी है. इस वजह से राजनीतिक पंडित भी इस सीट के नतीजों के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगा पा रहे हैं.

लंबे अरसे तक दार्जिलिंग में रहकर गोरखालैंड आंदोलन कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार तापस मुखर्जी कहते हैं, "यह चुनाव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और गोरखा मोर्चा अध्यक्ष रहे विमल गुरुंग के बीच साख की लड़ाई है. इस वजह से इस सीट की अहमियत काफी बढ़ गई है. ऐसे में कोई पूर्वानुमान लगाना मुश्किल है."

Tuesday, April 9, 2019

新疆军区某陆航旅高海拔紧急救援10名因雪崩被困人员

  中新网乌鲁木齐4月9日电(王小军 吴世科 于光彤) 新疆天山深处发生雪崩致多名群众被困。新疆军区某陆航旅高海拔参与救援,截至目前10名被困人员已安全转移。

  4月8日下午,正在组织跨昼夜飞行训练任务的新疆军区某陆航旅接到紧急救援命令,该旅旅长粟祥亲自带队救援,立即组织人员成立双机长救援机组研究航线和预案,下午6时,两驾直升机起飞赶往事发地。

  直升机进入山区,海拔逐渐升高,山体两侧峡谷陡峭,雪峰林立,积云很厚,直升机前方山体被云雾遮蔽,峡谷气流导致直升机异常颠簸,两驾直升机在狭窄的雪山峡谷中来回搜索,飞行员全神贯注地操纵直升机,机载搜救组观察四周情况,领航员实时标定位置,经过紧张地搜索,下午7时18分直升机飞至海拔近4000米的雪山峡谷里,在一座被云团包裹的雪山脚下发现了被困人员足迹,但是气象条件异常恶劣,足迹消失在云团中,被困者发来消息称可以听到直升机声音,但陡峭的雪山完全被云团遮蔽,直升机无法靠近降落,即将黄昏,山谷气象条件越来越差,直升机油量告警,只能返回

  4月9日上午8点35分,该旅2架直升机搭载搜救人员前往8日标定点再次展开救援,经过30分钟飞行,直升机进入雪山峡谷,旅长粟祥驾驶直升机紧贴雪山飞行,经过近10分钟的搜寻,直升机翻过一道雪梁,在一处雪山斜坡上发现了被困人员,救援地点在天山深处海拔3500米的地方,属于高原雪山紧急救援,救援难度很大,挑战着机组的飞行技术和应急能力。

  粟祥操纵直升机盘旋雪山上空寻找救援机降点位,副营长洪涛驾驶另一架直升机在高空盘旋观察第一架救援机组情况,实时提醒高度,救援直升机在被困人员上方悬停后,机组官兵利用吊篮迅速放下2名搜救队员,并成功利用吊篮将1名被困人员悬吊上直升机。但此时机组发现救援地势较陡,被困人员行动不便,采取吊篮救援10名被困人员需要较长时间,而直升机长时间高度悬停会导致超温超限,甚至单发停车,可救援时间紧迫,粟祥决定采取超低高度悬停救援,直升机缓缓下降,直升机轮子轻轻贴在雪山顶上。

  直升机在这种高海拔雪山地区容易受空中风和气流扰动影响,机组凭借多年的高原山区飞行经验和过硬的飞行技术将直升机贴在雪山悬停救援,每救上1人,机组就要微微调整直升机状态,被困人员在机组帮助下快速登上救援直升机,随机医疗人员对1名重伤员和2名轻伤员展开救治,机组沿着标定航线快速返回至天山北麓某机场,上午10时20分,机场等待的救护车和医疗人员将伤者立即转移到地方医院。

教育部:不建议占用假期补课

  教育部应对新冠肺炎疫情工作领导小组 英国首相约 色情性&肛交集合 翰逊在感染新型冠 色情性&肛交集合 状病毒康复两 色情性&肛交集合 周后, 色情性&肛交集合 将回到唐宁街继续 色情性&肛交集合 他的全职 色情性&肛交集合 领导工作。 在首相生病期 色情性&肛交集合 间...