地震对于中国四川来说并不罕见,但近两年来发生在该省南部的一系列地震却让当地人忧心忡忡,他们担心与中国正蓬勃开展的页岩气开采有关。
一项近期发表在美国地震学会期刊的研究似乎为这种说法提供了最新证据。该研究认为,数月前发生在四川南部兴文县和珙县的两次破坏性地震,均由水力压裂作业所引发。造成18人受伤的
水力压裂作业是开采页岩气的重要技术,过去十年间为美国带来了天然气和石油生产革命,依赖天然气进口的中国近年来也将其视为“救命稻草”。
但学者向BBC中文表示,由于中国更为复杂的地质构造,该技术面临更大的争议和难度。今年2月,在附近地区荣县的另一次频繁地震后,愤怒的村民一度包围县政府进行抗议。
这项本月初发表在美国地震学会期刊《地震研究快报》(Seismological Research Letters)的报告称,有多方面的“证据链条”表明,去年12月和今年1月发生在四川兴文县的5.7级和发生在珙县的5.3级地震,“可能”是由附近的水力压裂作业诱发。
据中国媒体报道,这两次地震共造成18人受伤,另有多处民房遭严重破坏。
这份研究报告引用日本地质调查所雷兴林博士和他的合作者称,他们确定了地震的震源位置,发现它们相对较浅,符合(外力)诱发地震的可能发生深度,两次地震也在时间和空间上与附近的水平井簇的压裂紧密相关。
这份发表在SRL的最新研究的依据还包括:统计分析显示,地震本身的余震活动很少,这也与典型的诱发地震的特征一致。他们(雷兴林博士和他的合作者)通过计算表明,水力压裂的高压注水所产生的岩石孔隙超压足以激活附近的已有断层。
但《地震研究快报》的报告也指出,他们没有更精确的压裂数据来进一步理解注水与地震活动之间的关系。
地处四川盆地南部的兴文县和珙县均属于四川宜宾市管辖,它们在数年前被纳入“长宁-威远国家级页岩气综合利用示范区”,境内均有中国国有能源巨头中国石油下属的页岩气开采项目。
此次公布的研究显然只是四川南部一系列地震中规模较大的两次。根据中国地震台网记录,自2018年以来,发生在川南的内江、自贡、泸州和宜宾四个城市辖区内被监测到的地震便有50余次。
今年2月24日,自贡境内的荣县发生多次地震,造成2人死亡,12人受伤。地震后不久,数千名愤怒的村民便聚集到荣县政府大楼外抗议。荣县政府随后宣布暂停当地15个页岩气平台的水力压裂作业。
“地震已经成为这片的日常。有时候一天都能有两三次震动。只要人是坐着或躺在床上,都会有明显感觉,”家住内江市资中县宋家镇的罗歆(化名)对BBC中文说。她的家离荣县县城约60公里,附近也有三处正热火朝天进行的页岩气项目。
“我们是经历过汶川和芦山地震的,但之前从来没有过这种小地震,就这几年小震特别多,”罗歆说。
在四川山峦起伏的田野和农田间,数以百计高高耸立的钻井平台正在运转。要获取页岩气,需要将化学液体注入地下,用水压将岩石层压裂,从而释放出其中的天然气,这便是水力压裂法。
数十年来,这种方法在美国的普及使该国能源供给大幅增加,由此带来的海量页岩气在拉低北美气价的同时也让美国成为天然气净出口国,因此被称为“页岩气革命”。
Tuesday, April 16, 2019
पश्चिम बंगाल के गोरखालैंड पर भारी है विकास
पहाड़ियों की रानी के नाम से मशहूर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की संसदीय सीट के लिए होने वाले चुनाव में लगभग तीन दशकों बाद पहली बार गोरखालैंड की बजाय विकास का मुद्दा हावी है.
तृणमूल कांग्रेस कभी इस सीट को नहीं जीत सकी है. बीजेपी ने भी पिछली बार जीते एस.एस.आहलुवालिया की जगह इस बार राजू सिंह बिष्ट को अपना उम्मीदवार बनाया है.
इस सीट के लिए दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होना है.
इलाके में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. जिस गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के एक इशारे पर इलाके में किसी भी उम्मीदवार की किस्मत तय होती थी, वह अब खुद ही दो गुटों में बंटा हुआ है.
मोर्चा का विमल गुरुंग वाला गुट बीजेपी के साथ है तो विनय तमांग वाला गुट ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ.
गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) ने भी बीजेपी को ही समर्थन देने का एलान किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा ममता और अमित शाह भी इस इलाके में चुनावी रैलियां कर चुके हैं.
अस्सी के दशक के उत्तरार्ध से इस इलाके में होने वाले तमाम चुनावों में अलग गोरखालैंड का मुद्दा ही हावी रहता था. पहले सुभाष घीसिंग की अगुवाई वाला गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) यह मुद्दा उठाता रहता था, उसके बाद विमल गुरुंग के नेतृत्व वाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा भी इसी मुद्दे पर अपना समर्थन तय करता था.
इसी वजह से मोर्चा ने पिछले दो चुनावों में भाजपा के क्रमशः जसवंत सिंह और एस.ए.आहलुवालिया को समर्थन देकर उनको यहां जिताया था. लेकिन अब खुद यह मोर्चा ही दो-फाड़ हो चुका है. गोरखा नेता विमल गुरुंग साल 2017 में हुए हिंसक आंदोलन के बाद से ही भूमिगत हैं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बार गोरखा मोर्चा विधायक अमर सिंह राई को अपना उम्मीदवार बनाया है. लेकिन बीजेपी ने आहलुवालिया की जगह 33 साल के एक कारोबारी राजू सिंह बिष्ट को मैदान में उतारा है.
मूल रूप से मणिपुर के रहने वाले राजू का दिल्ली में कारोबार है. गोरखा मोर्चा के विमल गुरुंग गुट के अलावा जीएनएलएफ ने भी उनके समर्थन का एलान किया है.
इसी वजह से ममता इलाके में अपने दौरे के दौरान स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठा चुकी हैं. इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है और दोनों दलों के उम्मीदवार उसी गोरखा तबके से हैं जो यहां निर्णायक हैं.
कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता शंकर मालाकार मैदान में हैं तो सीपीएम ने अपने पूर्व सांसद सुमन पाठक को उम्मीदवार बनाया है.
यहां इलाके के सबसे बड़े राजनीतिक दल ने जिसकी पीठ पर हाथ रख दिया उसकी जीत सौ फीसदी तय हो जाती है.
गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के जमाने में उसके तत्कालीन प्रमुख सुभाष घीसिंग के समर्थन से इंद्रजीत खुल्लर जीतते रहे थे. उसके बाद इलाके में सत्ता बदली और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा प्रमुख विमल गुरुंग के समर्थन से पहले जसवंत सिंह जीते और उसके बाद वर्ष 2014 में एस.एस. अहलुवालिया.
तृणमूल उम्मीदवार अमर सिंह कहते हैं, "विकास ही हमारा मुख्य मुद्दा है. बीते एक दशक से भी लंबे अरसे से इलाके में विकास का काम ठप है. बीजेपी सांसदों ने पहाड़ियों के विकास की दिशा में कोई पहल तक नहीं की है."
तृणणूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री गौतम देब कहते हैं, "अब अलग राज्य के मुद्दे को अलग रख कर विकास पर ध्यान देना जरूरी है. स्थानीय लोग भी अब इस बात को समझने लगे हैं."
बीजेपी के दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष मनोज दीवान कहते हैं, "हमारे लिए अलग राज्य कोई मुद्दा नहीं है. हम इस पर्वतीय इलाके की समस्या के स्थायी राजनीतिक समाधान और यहां लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ रहे हैं."
मोर्चा के विमल गुरुंग गुट के कार्यकारी अध्यक्ष लोकसांग लामा कहते हैं, "इन चुनावों से साबित हो जाएगा कि पहाड़ियों का शीर्ष नेता कौन है. स्थानीय लोग गुरुंग के साथ हैं."
बीजेपी उम्मीदवार राजू सिंह मानते हैं कि लोग अबकी पहाड़ियों में लोकतंत्र की बहाली के लिए वोट देंगे. वर्ष 2017 के गोरखालैंड आंदोलन के दौरान तृणणूल कांग्रेस के लोगों ने पुलिस और प्रशासन के साथ मिल कर जो अत्याचार किए हैं, उसे लोग अब तक नहीं भूल सके हैं.
वह कहते हैं कि दार्जिलिंग की समस्या का स्थायी राजनीतिक समाधान जरूरी है. लेकिन राजू सिंह अलग गोरखालैंड के मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करते.
दूसरी ओर सीपीएम उम्मीदवार और राज्यसभा के पूर्व सांसद सुमन पाठक कहते हैं, "इलाके के लोग बीजेपी और तृममूल कांग्रेस के झूठे वादों से आजिज़ आ चुके हैं. अबकी लोग एक बार फिर सीपीएम पर ही भरोसा जताएंगे."
दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से तीन पर्वतीय इलाके में हैं और बाकी चार मैदानी इलाकों में. मैदानी इलाकों की सीटों में से दो कांग्रेस के कब्जे में हैं और एक-एक सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस के.
पर्वतीय इलाके की सीटों पर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का ही कब्जा है. पर्वतीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे गोरखा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष कल्याण दीवान कहते हैं, "यह दशकों बाद पहला मौका है जब न तो कोई राजनीतिक दल गोरखालैंड की बात कर रहा है और न ही स्थानीय लोग इसकी चर्चा कर रहे हैं."
इस संसदीय क्षेत्र में उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला पर्वतीय इलाके के वोटर ही करते रहे हैं. लगभग 16 लाख वोटरों में से सात लाख तीनों पर्वतीय विधानसभा क्षेत्रों में हैं. यहां वही जीतता है जिसे इलाके पर पकड़ रखने वाली पार्टी समर्थन देती है.
पहले जीएनएलएफ वह पार्टी थी और बाद में गोरखा मोर्चा ने उसकी जगह ले ली. लेकिन अबकी वह गोरखा मोर्चा भी दो गुटों में बंटी है. इस वजह से राजनीतिक पंडित भी इस सीट के नतीजों के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगा पा रहे हैं.
लंबे अरसे तक दार्जिलिंग में रहकर गोरखालैंड आंदोलन कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार तापस मुखर्जी कहते हैं, "यह चुनाव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और गोरखा मोर्चा अध्यक्ष रहे विमल गुरुंग के बीच साख की लड़ाई है. इस वजह से इस सीट की अहमियत काफी बढ़ गई है. ऐसे में कोई पूर्वानुमान लगाना मुश्किल है."
तृणमूल कांग्रेस कभी इस सीट को नहीं जीत सकी है. बीजेपी ने भी पिछली बार जीते एस.एस.आहलुवालिया की जगह इस बार राजू सिंह बिष्ट को अपना उम्मीदवार बनाया है.
इस सीट के लिए दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होना है.
इलाके में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. जिस गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के एक इशारे पर इलाके में किसी भी उम्मीदवार की किस्मत तय होती थी, वह अब खुद ही दो गुटों में बंटा हुआ है.
मोर्चा का विमल गुरुंग वाला गुट बीजेपी के साथ है तो विनय तमांग वाला गुट ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ.
गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) ने भी बीजेपी को ही समर्थन देने का एलान किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा ममता और अमित शाह भी इस इलाके में चुनावी रैलियां कर चुके हैं.
अस्सी के दशक के उत्तरार्ध से इस इलाके में होने वाले तमाम चुनावों में अलग गोरखालैंड का मुद्दा ही हावी रहता था. पहले सुभाष घीसिंग की अगुवाई वाला गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) यह मुद्दा उठाता रहता था, उसके बाद विमल गुरुंग के नेतृत्व वाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा भी इसी मुद्दे पर अपना समर्थन तय करता था.
इसी वजह से मोर्चा ने पिछले दो चुनावों में भाजपा के क्रमशः जसवंत सिंह और एस.ए.आहलुवालिया को समर्थन देकर उनको यहां जिताया था. लेकिन अब खुद यह मोर्चा ही दो-फाड़ हो चुका है. गोरखा नेता विमल गुरुंग साल 2017 में हुए हिंसक आंदोलन के बाद से ही भूमिगत हैं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बार गोरखा मोर्चा विधायक अमर सिंह राई को अपना उम्मीदवार बनाया है. लेकिन बीजेपी ने आहलुवालिया की जगह 33 साल के एक कारोबारी राजू सिंह बिष्ट को मैदान में उतारा है.
मूल रूप से मणिपुर के रहने वाले राजू का दिल्ली में कारोबार है. गोरखा मोर्चा के विमल गुरुंग गुट के अलावा जीएनएलएफ ने भी उनके समर्थन का एलान किया है.
इसी वजह से ममता इलाके में अपने दौरे के दौरान स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठा चुकी हैं. इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है और दोनों दलों के उम्मीदवार उसी गोरखा तबके से हैं जो यहां निर्णायक हैं.
कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता शंकर मालाकार मैदान में हैं तो सीपीएम ने अपने पूर्व सांसद सुमन पाठक को उम्मीदवार बनाया है.
यहां इलाके के सबसे बड़े राजनीतिक दल ने जिसकी पीठ पर हाथ रख दिया उसकी जीत सौ फीसदी तय हो जाती है.
गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के जमाने में उसके तत्कालीन प्रमुख सुभाष घीसिंग के समर्थन से इंद्रजीत खुल्लर जीतते रहे थे. उसके बाद इलाके में सत्ता बदली और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा प्रमुख विमल गुरुंग के समर्थन से पहले जसवंत सिंह जीते और उसके बाद वर्ष 2014 में एस.एस. अहलुवालिया.
तृणमूल उम्मीदवार अमर सिंह कहते हैं, "विकास ही हमारा मुख्य मुद्दा है. बीते एक दशक से भी लंबे अरसे से इलाके में विकास का काम ठप है. बीजेपी सांसदों ने पहाड़ियों के विकास की दिशा में कोई पहल तक नहीं की है."
तृणणूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री गौतम देब कहते हैं, "अब अलग राज्य के मुद्दे को अलग रख कर विकास पर ध्यान देना जरूरी है. स्थानीय लोग भी अब इस बात को समझने लगे हैं."
बीजेपी के दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष मनोज दीवान कहते हैं, "हमारे लिए अलग राज्य कोई मुद्दा नहीं है. हम इस पर्वतीय इलाके की समस्या के स्थायी राजनीतिक समाधान और यहां लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ रहे हैं."
मोर्चा के विमल गुरुंग गुट के कार्यकारी अध्यक्ष लोकसांग लामा कहते हैं, "इन चुनावों से साबित हो जाएगा कि पहाड़ियों का शीर्ष नेता कौन है. स्थानीय लोग गुरुंग के साथ हैं."
बीजेपी उम्मीदवार राजू सिंह मानते हैं कि लोग अबकी पहाड़ियों में लोकतंत्र की बहाली के लिए वोट देंगे. वर्ष 2017 के गोरखालैंड आंदोलन के दौरान तृणणूल कांग्रेस के लोगों ने पुलिस और प्रशासन के साथ मिल कर जो अत्याचार किए हैं, उसे लोग अब तक नहीं भूल सके हैं.
वह कहते हैं कि दार्जिलिंग की समस्या का स्थायी राजनीतिक समाधान जरूरी है. लेकिन राजू सिंह अलग गोरखालैंड के मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करते.
दूसरी ओर सीपीएम उम्मीदवार और राज्यसभा के पूर्व सांसद सुमन पाठक कहते हैं, "इलाके के लोग बीजेपी और तृममूल कांग्रेस के झूठे वादों से आजिज़ आ चुके हैं. अबकी लोग एक बार फिर सीपीएम पर ही भरोसा जताएंगे."
दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से तीन पर्वतीय इलाके में हैं और बाकी चार मैदानी इलाकों में. मैदानी इलाकों की सीटों में से दो कांग्रेस के कब्जे में हैं और एक-एक सीपीएम और तृणमूल कांग्रेस के.
पर्वतीय इलाके की सीटों पर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का ही कब्जा है. पर्वतीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे गोरखा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष कल्याण दीवान कहते हैं, "यह दशकों बाद पहला मौका है जब न तो कोई राजनीतिक दल गोरखालैंड की बात कर रहा है और न ही स्थानीय लोग इसकी चर्चा कर रहे हैं."
इस संसदीय क्षेत्र में उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला पर्वतीय इलाके के वोटर ही करते रहे हैं. लगभग 16 लाख वोटरों में से सात लाख तीनों पर्वतीय विधानसभा क्षेत्रों में हैं. यहां वही जीतता है जिसे इलाके पर पकड़ रखने वाली पार्टी समर्थन देती है.
पहले जीएनएलएफ वह पार्टी थी और बाद में गोरखा मोर्चा ने उसकी जगह ले ली. लेकिन अबकी वह गोरखा मोर्चा भी दो गुटों में बंटी है. इस वजह से राजनीतिक पंडित भी इस सीट के नतीजों के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगा पा रहे हैं.
लंबे अरसे तक दार्जिलिंग में रहकर गोरखालैंड आंदोलन कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार तापस मुखर्जी कहते हैं, "यह चुनाव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और गोरखा मोर्चा अध्यक्ष रहे विमल गुरुंग के बीच साख की लड़ाई है. इस वजह से इस सीट की अहमियत काफी बढ़ गई है. ऐसे में कोई पूर्वानुमान लगाना मुश्किल है."
Tuesday, April 9, 2019
新疆军区某陆航旅高海拔紧急救援10名因雪崩被困人员
中新网乌鲁木齐4月9日电(王小军 吴世科 于光彤) 新疆天山深处发生雪崩致多名群众被困。新疆军区某陆航旅高海拔参与救援,截至目前10名被困人员已安全转移。
4月8日下午,正在组织跨昼夜飞行训练任务的新疆军区某陆航旅接到紧急救援命令,该旅旅长粟祥亲自带队救援,立即组织人员成立双机长救援机组研究航线和预案,下午6时,两驾直升机起飞赶往事发地。
直升机进入山区,海拔逐渐升高,山体两侧峡谷陡峭,雪峰林立,积云很厚,直升机前方山体被云雾遮蔽,峡谷气流导致直升机异常颠簸,两驾直升机在狭窄的雪山峡谷中来回搜索,飞行员全神贯注地操纵直升机,机载搜救组观察四周情况,领航员实时标定位置,经过紧张地搜索,下午7时18分直升机飞至海拔近4000米的雪山峡谷里,在一座被云团包裹的雪山脚下发现了被困人员足迹,但是气象条件异常恶劣,足迹消失在云团中,被困者发来消息称可以听到直升机声音,但陡峭的雪山完全被云团遮蔽,直升机无法靠近降落,即将黄昏,山谷气象条件越来越差,直升机油量告警,只能返回。
4月9日上午8点35分,该旅2架直升机搭载搜救人员前往8日标定点再次展开救援,经过30分钟飞行,直升机进入雪山峡谷,旅长粟祥驾驶直升机紧贴雪山飞行,经过近10分钟的搜寻,直升机翻过一道雪梁,在一处雪山斜坡上发现了被困人员,救援地点在天山深处海拔3500米的地方,属于高原雪山紧急救援,救援难度很大,挑战着机组的飞行技术和应急能力。
粟祥操纵直升机盘旋雪山上空寻找救援机降点位,副营长洪涛驾驶另一架直升机在高空盘旋观察第一架救援机组情况,实时提醒高度,救援直升机在被困人员上方悬停后,机组官兵利用吊篮迅速放下2名搜救队员,并成功利用吊篮将1名被困人员悬吊上直升机。但此时机组发现救援地势较陡,被困人员行动不便,采取吊篮救援10名被困人员需要较长时间,而直升机长时间高度悬停会导致超温超限,甚至单发停车,可救援时间紧迫,粟祥决定采取超低高度悬停救援,直升机缓缓下降,直升机轮子轻轻贴在雪山顶上。
直升机在这种高海拔雪山地区容易受空中风和气流扰动影响,机组凭借多年的高原山区飞行经验和过硬的飞行技术将直升机贴在雪山悬停救援,每救上1人,机组就要微微调整直升机状态,被困人员在机组帮助下快速登上救援直升机,随机医疗人员对1名重伤员和2名轻伤员展开救治,机组沿着标定航线快速返回至天山北麓某机场,上午10时20分,机场等待的救护车和医疗人员将伤者立即转移到地方医院。
4月8日下午,正在组织跨昼夜飞行训练任务的新疆军区某陆航旅接到紧急救援命令,该旅旅长粟祥亲自带队救援,立即组织人员成立双机长救援机组研究航线和预案,下午6时,两驾直升机起飞赶往事发地。
直升机进入山区,海拔逐渐升高,山体两侧峡谷陡峭,雪峰林立,积云很厚,直升机前方山体被云雾遮蔽,峡谷气流导致直升机异常颠簸,两驾直升机在狭窄的雪山峡谷中来回搜索,飞行员全神贯注地操纵直升机,机载搜救组观察四周情况,领航员实时标定位置,经过紧张地搜索,下午7时18分直升机飞至海拔近4000米的雪山峡谷里,在一座被云团包裹的雪山脚下发现了被困人员足迹,但是气象条件异常恶劣,足迹消失在云团中,被困者发来消息称可以听到直升机声音,但陡峭的雪山完全被云团遮蔽,直升机无法靠近降落,即将黄昏,山谷气象条件越来越差,直升机油量告警,只能返回。
4月9日上午8点35分,该旅2架直升机搭载搜救人员前往8日标定点再次展开救援,经过30分钟飞行,直升机进入雪山峡谷,旅长粟祥驾驶直升机紧贴雪山飞行,经过近10分钟的搜寻,直升机翻过一道雪梁,在一处雪山斜坡上发现了被困人员,救援地点在天山深处海拔3500米的地方,属于高原雪山紧急救援,救援难度很大,挑战着机组的飞行技术和应急能力。
粟祥操纵直升机盘旋雪山上空寻找救援机降点位,副营长洪涛驾驶另一架直升机在高空盘旋观察第一架救援机组情况,实时提醒高度,救援直升机在被困人员上方悬停后,机组官兵利用吊篮迅速放下2名搜救队员,并成功利用吊篮将1名被困人员悬吊上直升机。但此时机组发现救援地势较陡,被困人员行动不便,采取吊篮救援10名被困人员需要较长时间,而直升机长时间高度悬停会导致超温超限,甚至单发停车,可救援时间紧迫,粟祥决定采取超低高度悬停救援,直升机缓缓下降,直升机轮子轻轻贴在雪山顶上。
直升机在这种高海拔雪山地区容易受空中风和气流扰动影响,机组凭借多年的高原山区飞行经验和过硬的飞行技术将直升机贴在雪山悬停救援,每救上1人,机组就要微微调整直升机状态,被困人员在机组帮助下快速登上救援直升机,随机医疗人员对1名重伤员和2名轻伤员展开救治,机组沿着标定航线快速返回至天山北麓某机场,上午10时20分,机场等待的救护车和医疗人员将伤者立即转移到地方医院。
Sunday, March 31, 2019
राहुल गाँधी बदले-बदले से नज़र आते हैं !
जब इंदिरा गाँधी कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थीं तो वो सिर्फ़ 42 साल की थीं. संजय गांधी ने जब अपना पहला चुनाव लड़ा था तो वो मात्र 30 साल के थे. राजीव गाँधी जब राजनीति में आए थे तो उन्होंने अपने जीवन के सिर्फ़ 36 वसंत देखे थे.
राहुल जब पहली बार 2004 में राजनीति में आए तो वो भारतीय राजनीति के मानकों के हिसाब से 'बच्चे' ही थे, हालाँकि उस समय उनकी उम्र 34 साल की हो चुकी थी.
दिलचस्प बात ये है कि राजनीति में डेढ़ दशक से भी अधिक समय बिता देने और चालीस की उम्र पार कर जाने के बावजूद उन्हें 'बच्चा' ही समझा जाता रहा.
लेकिन, जब 2008 में एक इंटरव्यू में बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने राहुल को 'बच्चा' कह कर ख़ारिज करने की कोशिश की तो उन्होंने उसका अच्छा प्रतिवाद भी किया और कहा- "अगर मैं उनकी नज़र में 'बच्चा' हूँ तो आप इसे पसंद कीजिए या नापसंद , भारत की 70 फ़ीसदी आबादी भी 'बच्चा' है."
भारतीय राजनीति में अभी भी युवा होने को नादानी से जोड़ कर देखा जाता है. लेकिन, भारतीय राजनीति पर पैनी नज़र रखने वाले पंडित मानेंगे कि राहुल गांधी उस 'लेबल' से अब बाहर निकल आए हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में शीर्ष पद के दावेदार हैं.
राहुल गाँधी का राजनीतिक बपतिस्मा अपनी दादी इंदिरा गाँधी को देखते-देखते हुआ. 19 जून, 1970 को राहुल के जन्म के कुछ दिनों बाद इंदिरा गाँधी ने अमरीका में रह रही अपनी दोस्त डोरोथी नॉर्मन को लिखा, "राहुल की झुर्रियाँ ख़त्म हो गईं हैं लेकिन उसकी 'डबल चिन' अब भी बरकरार है."
इंदिरा गांधी की जीवनी लिखने वालीं कैथरीन फ़्रैंक लिखती हैं, "बचपन से ही प्रियंका और राहुल अक्सर सुबह उनके निवास के लॉन में होने वाले दर्शन दरबार में उनके साथ हुआ करते थे. इस दरबार में वो आम लोगों से मिलती थीं. रात में भी वो इन दोनों को अक्सर अपने ही शयन-कक्ष में सुलाती थीं."
राहुल गांधी ने पहले दून स्कूल में पढ़ाई की और फिर इसके बाद दिल्ली के मशहूर सेंट स्टीफेंस कॉलेज में. इसके बाद वो अमरीका चले गए जहाँ उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के छात्र के रूप में दाख़िला लिया. सुरक्षा कारणों से उन्हें हार्वर्ड से हट कर विंटर पार्क, फ़्लोरिडा के एक कॉलेज में दाख़िला लेना पड़ा. वहाँ से उन्होंने 1994 में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में डिग्री ली.
इसके बाद वो केंब्रिज विश्वविद्यालय के मशहूर ट्रिनिटी कॉलेज चले गए. वहाँ से उन्होंने 1995 में 'डेवलपमेंट स्टडीज़' में 'एमफ़िल' किया. इसके बाद वो लंदन में दुनिया में 'ब्रैंड स्ट्रेटेजी' की बड़ी कंपनी 'मॉनीटर ग्रुप' में नौकरी करने लगे. उन्होंने इस कंपनी में अपना नाम बदल कर तीन साल तक नौकरी की. जब तक वो वहाँ रहे उनके साथियों को इसकी भनक भी नहीं लग पाई कि वो इंदिरा गाँधी के पोते के साथ काम कर रहे हैं.
वर्ष 2002 में राहुल वापस भारत लौटे. उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिल कर मुंबई में एक कंपनी शुरू की, 'बैकॉप्स सर्विसेज़ लिमिटेड.' वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में दिए गए हलफ़नामे में उन्होंने साफ़ लिखा कि इस कंपनी में उनके 83 फ़ीसदी शेयर हैं.
2008 की गर्मियों में भारत के उस समय के सबसे बड़े बॉक्सिंग कोच और द्रोणाचार्य विजेता ओमप्रकाश भारद्वाज के पास भारतीय खेल प्राधिकरण की तरफ़ से एक फ़ोन आया. उनको बताया गया कि 10, जनपथ से एक साहब आपसे संपर्क करेंगे. कुछ देर बाद पी माधवन ने भारद्वाज को फ़ोन कर कहा कि राहुल गाँधी आपसे बॉक्सिंग सीखना चाहते हैं. भारद्वाज इसके लिए तुरंत राज़ी हो गए.
राहुल गांधी की जीवनी लिखने वाले जतिन गांधी बताते हैं, "जब फ़ीस की बात आई तो भारद्वाज ने सिर्फ़ ये मांग की कि उन्हें उनके घर से 'पिक' करा लिया जाए और ट्रेनिंग के बाद उन्हें वापस उनके घर छोड़ दिया जाए. भारद्वाज ने 12 तुग़लक लेन के लॉन पर राहुल गांधी को मुक्केबाज़ी की ट्रेनिंग दी. ये सिलसिला कई हफ़्तों तक चला, सप्ताह में तीन दिन."
इस दौरान कई बार सोनिया, प्रियंका और उनके बच्चे माएरा और रेहान भी राहुल को ट्रेनिंग करते देखने आते थे. भारद्वाज याद करते हैं कि वो जब भी राहुल को 'सर' या 'राहुल जी' कह कर संबोधित करते थे, तो वो उन्हें हमेशा टोक कर कहते थे कि वो उन्हें सिर्फ़ राहुल कहें. वो उनके छात्र हैं.
भारद्वाज बताते हैं, "एक बार मुझे प्यास लगी और मैंने पानी पीने की इच्छा प्रकट की. हालांकि, वहाँ कई नौकर मौजूद थे, लेकिन राहुल खुद दौड़ कर मेरे लिए पानी लाए. ट्रेनिंग ख़त्म हो जाने के बाद वो हमेशा मुझे गेट तक छोड़ने जाते थे."
बॉक्सिंग ही नहीं राहुल ने तैराकी, स्क्वॉश, पैराग्लाइडिंग और निशानेबाज़ी में भी महारत हासिल की. अब भी वो चाहे जितना व्यस्त हों, कसरत के लिए थोड़ा समय निकाल ही लेते हैं. अप्रैल, 2011 में मुंबई में खेले जा रहे विश्व कप मैच के दौरान राहुल अपने कुछ साथियों के साथ चौपाटी के न्यू यॉर्कर रेस्तराँ पहुंचे जहाँ उन्होंने पित्ज़ा, पास्ता और 'मेक्सिकन टोस्टाडा' का ऑर्डर किया.
रेस्तराँ के मैनेजर ने राहुल से खाने का बिल लेने से इनकार कर दिया लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर 2223 रुपए का बिल चुकाया. अब भी राहुल दिल्ली की मशहूर ख़ान मार्केट में कभी-कभी कॉफ़ी पीने जाते हैं. आंध्र भवन की कैंटीन में भी उन्होंने कई बार दक्षिण भारतीय थाली का आनंद उठाया है.
मुंबई की अपनी एक दूसरी यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने अचानक सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को धता बताते हुए वहाँ की मुंबई की 'लाइफ़ लाइन' कही जाने वाली लोकल ट्रेन से सफ़र करने का फ़ैसला लिया. उन्होंने बाकायदा प्लेटफ़ॉर्म पर ट्रेन का इंतज़ार किया.
रेलवे लाइन के बग़ल में और सामने के प्लेटफॉर्म पर खड़े हुए लोगों को 'वेव' किया. ट्रेन के अंदर भी उन्होंने एक दूसरे यात्री के साथ अपनी सीट 'शेयर' की, सामने की सीट पर बैठे लोगों से हाथ मिलाया और तमाम शोर के बीच एक मोबाइल कॉल भी 'रिसीव' किया. जब वो ट्रेन से उतरे तो उन्होंने वहाँ मौजूद मीडिया से एक शब्द बात नहीं की. बात यहीं पर ख़त्म नहीं हुई. वो एक एटीएम पर रुके और वहाँ से उन्होंने कुछ पैसे निकाले.
राहुल जब पहली बार 2004 में राजनीति में आए तो वो भारतीय राजनीति के मानकों के हिसाब से 'बच्चे' ही थे, हालाँकि उस समय उनकी उम्र 34 साल की हो चुकी थी.
दिलचस्प बात ये है कि राजनीति में डेढ़ दशक से भी अधिक समय बिता देने और चालीस की उम्र पार कर जाने के बावजूद उन्हें 'बच्चा' ही समझा जाता रहा.
लेकिन, जब 2008 में एक इंटरव्यू में बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने राहुल को 'बच्चा' कह कर ख़ारिज करने की कोशिश की तो उन्होंने उसका अच्छा प्रतिवाद भी किया और कहा- "अगर मैं उनकी नज़र में 'बच्चा' हूँ तो आप इसे पसंद कीजिए या नापसंद , भारत की 70 फ़ीसदी आबादी भी 'बच्चा' है."
भारतीय राजनीति में अभी भी युवा होने को नादानी से जोड़ कर देखा जाता है. लेकिन, भारतीय राजनीति पर पैनी नज़र रखने वाले पंडित मानेंगे कि राहुल गांधी उस 'लेबल' से अब बाहर निकल आए हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में शीर्ष पद के दावेदार हैं.
राहुल गाँधी का राजनीतिक बपतिस्मा अपनी दादी इंदिरा गाँधी को देखते-देखते हुआ. 19 जून, 1970 को राहुल के जन्म के कुछ दिनों बाद इंदिरा गाँधी ने अमरीका में रह रही अपनी दोस्त डोरोथी नॉर्मन को लिखा, "राहुल की झुर्रियाँ ख़त्म हो गईं हैं लेकिन उसकी 'डबल चिन' अब भी बरकरार है."
इंदिरा गांधी की जीवनी लिखने वालीं कैथरीन फ़्रैंक लिखती हैं, "बचपन से ही प्रियंका और राहुल अक्सर सुबह उनके निवास के लॉन में होने वाले दर्शन दरबार में उनके साथ हुआ करते थे. इस दरबार में वो आम लोगों से मिलती थीं. रात में भी वो इन दोनों को अक्सर अपने ही शयन-कक्ष में सुलाती थीं."
राहुल गांधी ने पहले दून स्कूल में पढ़ाई की और फिर इसके बाद दिल्ली के मशहूर सेंट स्टीफेंस कॉलेज में. इसके बाद वो अमरीका चले गए जहाँ उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के छात्र के रूप में दाख़िला लिया. सुरक्षा कारणों से उन्हें हार्वर्ड से हट कर विंटर पार्क, फ़्लोरिडा के एक कॉलेज में दाख़िला लेना पड़ा. वहाँ से उन्होंने 1994 में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में डिग्री ली.
इसके बाद वो केंब्रिज विश्वविद्यालय के मशहूर ट्रिनिटी कॉलेज चले गए. वहाँ से उन्होंने 1995 में 'डेवलपमेंट स्टडीज़' में 'एमफ़िल' किया. इसके बाद वो लंदन में दुनिया में 'ब्रैंड स्ट्रेटेजी' की बड़ी कंपनी 'मॉनीटर ग्रुप' में नौकरी करने लगे. उन्होंने इस कंपनी में अपना नाम बदल कर तीन साल तक नौकरी की. जब तक वो वहाँ रहे उनके साथियों को इसकी भनक भी नहीं लग पाई कि वो इंदिरा गाँधी के पोते के साथ काम कर रहे हैं.
वर्ष 2002 में राहुल वापस भारत लौटे. उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिल कर मुंबई में एक कंपनी शुरू की, 'बैकॉप्स सर्विसेज़ लिमिटेड.' वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में दिए गए हलफ़नामे में उन्होंने साफ़ लिखा कि इस कंपनी में उनके 83 फ़ीसदी शेयर हैं.
2008 की गर्मियों में भारत के उस समय के सबसे बड़े बॉक्सिंग कोच और द्रोणाचार्य विजेता ओमप्रकाश भारद्वाज के पास भारतीय खेल प्राधिकरण की तरफ़ से एक फ़ोन आया. उनको बताया गया कि 10, जनपथ से एक साहब आपसे संपर्क करेंगे. कुछ देर बाद पी माधवन ने भारद्वाज को फ़ोन कर कहा कि राहुल गाँधी आपसे बॉक्सिंग सीखना चाहते हैं. भारद्वाज इसके लिए तुरंत राज़ी हो गए.
राहुल गांधी की जीवनी लिखने वाले जतिन गांधी बताते हैं, "जब फ़ीस की बात आई तो भारद्वाज ने सिर्फ़ ये मांग की कि उन्हें उनके घर से 'पिक' करा लिया जाए और ट्रेनिंग के बाद उन्हें वापस उनके घर छोड़ दिया जाए. भारद्वाज ने 12 तुग़लक लेन के लॉन पर राहुल गांधी को मुक्केबाज़ी की ट्रेनिंग दी. ये सिलसिला कई हफ़्तों तक चला, सप्ताह में तीन दिन."
इस दौरान कई बार सोनिया, प्रियंका और उनके बच्चे माएरा और रेहान भी राहुल को ट्रेनिंग करते देखने आते थे. भारद्वाज याद करते हैं कि वो जब भी राहुल को 'सर' या 'राहुल जी' कह कर संबोधित करते थे, तो वो उन्हें हमेशा टोक कर कहते थे कि वो उन्हें सिर्फ़ राहुल कहें. वो उनके छात्र हैं.
भारद्वाज बताते हैं, "एक बार मुझे प्यास लगी और मैंने पानी पीने की इच्छा प्रकट की. हालांकि, वहाँ कई नौकर मौजूद थे, लेकिन राहुल खुद दौड़ कर मेरे लिए पानी लाए. ट्रेनिंग ख़त्म हो जाने के बाद वो हमेशा मुझे गेट तक छोड़ने जाते थे."
बॉक्सिंग ही नहीं राहुल ने तैराकी, स्क्वॉश, पैराग्लाइडिंग और निशानेबाज़ी में भी महारत हासिल की. अब भी वो चाहे जितना व्यस्त हों, कसरत के लिए थोड़ा समय निकाल ही लेते हैं. अप्रैल, 2011 में मुंबई में खेले जा रहे विश्व कप मैच के दौरान राहुल अपने कुछ साथियों के साथ चौपाटी के न्यू यॉर्कर रेस्तराँ पहुंचे जहाँ उन्होंने पित्ज़ा, पास्ता और 'मेक्सिकन टोस्टाडा' का ऑर्डर किया.
रेस्तराँ के मैनेजर ने राहुल से खाने का बिल लेने से इनकार कर दिया लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर 2223 रुपए का बिल चुकाया. अब भी राहुल दिल्ली की मशहूर ख़ान मार्केट में कभी-कभी कॉफ़ी पीने जाते हैं. आंध्र भवन की कैंटीन में भी उन्होंने कई बार दक्षिण भारतीय थाली का आनंद उठाया है.
मुंबई की अपनी एक दूसरी यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने अचानक सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को धता बताते हुए वहाँ की मुंबई की 'लाइफ़ लाइन' कही जाने वाली लोकल ट्रेन से सफ़र करने का फ़ैसला लिया. उन्होंने बाकायदा प्लेटफ़ॉर्म पर ट्रेन का इंतज़ार किया.
रेलवे लाइन के बग़ल में और सामने के प्लेटफॉर्म पर खड़े हुए लोगों को 'वेव' किया. ट्रेन के अंदर भी उन्होंने एक दूसरे यात्री के साथ अपनी सीट 'शेयर' की, सामने की सीट पर बैठे लोगों से हाथ मिलाया और तमाम शोर के बीच एक मोबाइल कॉल भी 'रिसीव' किया. जब वो ट्रेन से उतरे तो उन्होंने वहाँ मौजूद मीडिया से एक शब्द बात नहीं की. बात यहीं पर ख़त्म नहीं हुई. वो एक एटीएम पर रुके और वहाँ से उन्होंने कुछ पैसे निकाले.
Tuesday, March 19, 2019
解读:我们为何对猫咪如此痴迷?
自猫咪录像在十多年前亮相互联网屏幕以来,形形色色的网红猫吸引了世界各地成千上万的观众。人们为什么会对猫如此痴迷呢?一位男士给出了答案。
美国威斯康星州密尔沃基的一个老电影院里座无虚席,我跟将近800位观众耐心等候着,影院里充斥着爆米花的香气,人们似乎在期盼一部刚刚发行的好莱坞大片的首映。
实际上,上映的是从互联网上下载编辑的猫咪录像片段,像故事片一样长。放映期间,观众席不时发出惊叹、感慨和欢笑。银幕上出现的不仅有猫咪的搞笑镜头,亦有令人深思的画面。
例如,一只双目失明的猫如何顽强生活,最终有了一个幸福家庭;还有一只猫不惧危险独自吓走一头棕熊…我不得不承认,观看期间我竟然几次落泪。
这个录像剪辑片是39岁的电影制作人威尔•布莱顿( Will Braden )的作品,他来自西雅图。
过去几年来,这位在猫录像世界里的领军人物浏览了数以万计的录像片,仅去年一年他就浏览了15-17万个猫录像。可以说,威尔本人也没想到自己的事业线会如此发展。要说他与猫咪录像的缘分可以回溯到2006年,当时他还是西雅图电影学院( The Seattle Film Institute )的学生。
焦虑之际,他被他正在照料的一只家庭宠物猫所吸引。"我想,或许我可以拍一下这只猫,如果模仿我们正在观赏的一些法国新浪潮老电影的风格来拍,再拍得滑稽一点,或许他们不会注意到我的片子没有严格按要求拍这件事。"
威尔家的这只猫叫"亨利",是一只长毛黑白礼服猫( tuxedo cat ),为了给猫片添加一抹法国风情,威尔将其题为 Henri le Chat Noir (黑猫亨利)。
这个小片拍摄了"亨利"的默片镜头,加上对环绕它的人类环境的颇具批判色彩的解说。在2007年,他将这个小片上传到YouTube,当时这个视频网站还在萌芽阶段,而当时也正是猫咪录像刚开始在互联网崭露头角的时期。
后来,又过了5年,威尔才拍摄了"亨利"续集 - Henri 2, Paw de Deux 。这是因为威尔在脸书(Facebook)上为"亨利"注册了一个帐户,"亨利"的粉丝们央求威尔拍个续集。
"我就拍了个新录像片,马上就走红了 - 差不多在四、五天内就有了一百万点击率。"威尔说。
2012年,在美国明尼阿波利斯市的沃克尔艺术中心( Walker Art Centre )举办了首届互联网猫录像艺术节( Internet Cat Video Festival ),威尔拍的亨利录像片收到数以千计的公众推荐而入选艺术节。
威尔出席了艺术节,但令他没想到的是,他最后竟然赢得"金猫"大奖( Golden Kitty )……想一下奥斯卡最佳影片奖!
这一大奖将"亨利"直接推上大众传媒的明星宝座。"亨利"不仅为威尔赢来一个出书交易,还得到一个猫粮公司的广告赞助。
现在"亨利"已经有些岁数了,去年它在YouTube上正式与它的粉丝们告别,光荣退休了。
但对威尔来说,猫咪录像仍然是他生活的重要部分。他开始帮助组织2014年的猫录像艺术节,2016年当沃克尔艺术中心停止主办这个艺术节之后,他独挑大梁继续主办这个艺术节。
他每天都在网上浏览世界各地上传的猫咪录像,发出作品委约,预订场地,并自己做市场推广。
2018年,他签了一个美国全国范围发行合同,使得猫录像艺术节的门票销售额直线上升。到2019年底,他拍摄的互联网猫咪录像剪辑片将在美国200多家电影院上映。票房所得的很大一部分将捐献给各个城市的猫庇护所。
在最初的几个月,就已经筹集了上万美元。其中一个发行人安德鲁•卡林( Andrew Carlin )说,仅仅在底特律的5场放映,票房就超过了37,000美元 -票房甚至击败了刚上映的好莱坞大片《神奇队长》 (Captain Marvel )。
"能在芝加哥或纽约布鲁克林这种时髦地区的电影院门票售罄,已经不容易。"威尔说,"但我们还在德克萨斯的卢博克和威斯康星的阿普尔顿又加映了三场。"
当谈到他太太的家人如何费劲地跟其他人解释他家女婿的不寻常职业时,威尔大笑起来。
猫咪录像在互联网上风行这种现象转眼已经十多年了,至今没有过气的迹象。这是为什么呢?我们为什么对猫的生活如此感兴趣呢?
"我们宠爱猫咪,但有时也想看看它们小倒霉一下。"威尔说。
他说,他曾经试图拍摄制作狗狗的类似录像,但完全没有同样效果。
"因为猫咪总是那么优雅,一副超然的样子,我们喜欢看到它们摔倒、失足掉落的样子,而当我们看到一条狗不小心摔倒或掉落,我们会担心:哎呀,它没伤着吧?"
威尔还认为,猫录像艺术节的成功其实是现在人们无穷尽观看大众传媒的副产品。
"如果你坐在那儿一口气看四个猫咪录像片,猜猜看下一步会发生什么。"他说,"这种电影节就会应运而生,你肯定会坐在观众席,这种以猫咪为主角的片子就会为你制作出来。"
回到密尔沃基的老电影院里,观众们情绪兴奋。观众里男女老少都有,有些人甚至把自己打扮成猫咪模样。
美国威斯康星州密尔沃基的一个老电影院里座无虚席,我跟将近800位观众耐心等候着,影院里充斥着爆米花的香气,人们似乎在期盼一部刚刚发行的好莱坞大片的首映。
实际上,上映的是从互联网上下载编辑的猫咪录像片段,像故事片一样长。放映期间,观众席不时发出惊叹、感慨和欢笑。银幕上出现的不仅有猫咪的搞笑镜头,亦有令人深思的画面。
例如,一只双目失明的猫如何顽强生活,最终有了一个幸福家庭;还有一只猫不惧危险独自吓走一头棕熊…我不得不承认,观看期间我竟然几次落泪。
这个录像剪辑片是39岁的电影制作人威尔•布莱顿( Will Braden )的作品,他来自西雅图。
过去几年来,这位在猫录像世界里的领军人物浏览了数以万计的录像片,仅去年一年他就浏览了15-17万个猫录像。可以说,威尔本人也没想到自己的事业线会如此发展。要说他与猫咪录像的缘分可以回溯到2006年,当时他还是西雅图电影学院( The Seattle Film Institute )的学生。
焦虑之际,他被他正在照料的一只家庭宠物猫所吸引。"我想,或许我可以拍一下这只猫,如果模仿我们正在观赏的一些法国新浪潮老电影的风格来拍,再拍得滑稽一点,或许他们不会注意到我的片子没有严格按要求拍这件事。"
威尔家的这只猫叫"亨利",是一只长毛黑白礼服猫( tuxedo cat ),为了给猫片添加一抹法国风情,威尔将其题为 Henri le Chat Noir (黑猫亨利)。
这个小片拍摄了"亨利"的默片镜头,加上对环绕它的人类环境的颇具批判色彩的解说。在2007年,他将这个小片上传到YouTube,当时这个视频网站还在萌芽阶段,而当时也正是猫咪录像刚开始在互联网崭露头角的时期。
后来,又过了5年,威尔才拍摄了"亨利"续集 - Henri 2, Paw de Deux 。这是因为威尔在脸书(Facebook)上为"亨利"注册了一个帐户,"亨利"的粉丝们央求威尔拍个续集。
"我就拍了个新录像片,马上就走红了 - 差不多在四、五天内就有了一百万点击率。"威尔说。
2012年,在美国明尼阿波利斯市的沃克尔艺术中心( Walker Art Centre )举办了首届互联网猫录像艺术节( Internet Cat Video Festival ),威尔拍的亨利录像片收到数以千计的公众推荐而入选艺术节。
威尔出席了艺术节,但令他没想到的是,他最后竟然赢得"金猫"大奖( Golden Kitty )……想一下奥斯卡最佳影片奖!
这一大奖将"亨利"直接推上大众传媒的明星宝座。"亨利"不仅为威尔赢来一个出书交易,还得到一个猫粮公司的广告赞助。
现在"亨利"已经有些岁数了,去年它在YouTube上正式与它的粉丝们告别,光荣退休了。
但对威尔来说,猫咪录像仍然是他生活的重要部分。他开始帮助组织2014年的猫录像艺术节,2016年当沃克尔艺术中心停止主办这个艺术节之后,他独挑大梁继续主办这个艺术节。
他每天都在网上浏览世界各地上传的猫咪录像,发出作品委约,预订场地,并自己做市场推广。
2018年,他签了一个美国全国范围发行合同,使得猫录像艺术节的门票销售额直线上升。到2019年底,他拍摄的互联网猫咪录像剪辑片将在美国200多家电影院上映。票房所得的很大一部分将捐献给各个城市的猫庇护所。
在最初的几个月,就已经筹集了上万美元。其中一个发行人安德鲁•卡林( Andrew Carlin )说,仅仅在底特律的5场放映,票房就超过了37,000美元 -票房甚至击败了刚上映的好莱坞大片《神奇队长》 (Captain Marvel )。
"能在芝加哥或纽约布鲁克林这种时髦地区的电影院门票售罄,已经不容易。"威尔说,"但我们还在德克萨斯的卢博克和威斯康星的阿普尔顿又加映了三场。"
当谈到他太太的家人如何费劲地跟其他人解释他家女婿的不寻常职业时,威尔大笑起来。
猫咪录像在互联网上风行这种现象转眼已经十多年了,至今没有过气的迹象。这是为什么呢?我们为什么对猫的生活如此感兴趣呢?
"我们宠爱猫咪,但有时也想看看它们小倒霉一下。"威尔说。
他说,他曾经试图拍摄制作狗狗的类似录像,但完全没有同样效果。
"因为猫咪总是那么优雅,一副超然的样子,我们喜欢看到它们摔倒、失足掉落的样子,而当我们看到一条狗不小心摔倒或掉落,我们会担心:哎呀,它没伤着吧?"
威尔还认为,猫录像艺术节的成功其实是现在人们无穷尽观看大众传媒的副产品。
"如果你坐在那儿一口气看四个猫咪录像片,猜猜看下一步会发生什么。"他说,"这种电影节就会应运而生,你肯定会坐在观众席,这种以猫咪为主角的片子就会为你制作出来。"
回到密尔沃基的老电影院里,观众们情绪兴奋。观众里男女老少都有,有些人甚至把自己打扮成猫咪模样。
Wednesday, March 6, 2019
वीके सिंह का ट्वीट- रात 3.30 बजे मच्छर बहुत थे, मैंने हिट मारा; अब गिनती करूं या सो जाऊं
नई दिल्ली. एयर स्ट्राइक के दौरान पाक सीमा में मारे गए आतंकियों की संख्या पर विपक्ष सवाल उठा रहा है। इस पर विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने बुधवार को ट्वीट किया कि रात 3.30 बजे मच्छर बहुत थे, तो मैंने हिट मारा। अब मच्छर कितने मारे, ये गिनने बैठूं या आराम से सो जाऊं। इससे पहले मंगलवार को सिंह ने कहा था कि एयर स्ट्राइक में हमारी तरफ से 250 मौतों की बात कही जा रही है, वे सिर्फ बालाकोट में ही मारे गए। इसमें कहीं और के आंकड़े शामिल नहीं हैं। अमित शाह ने एयर स्ट्राइक में 250 से ज्यादा आतंकियो के मारे जाने का दावा किया था।
'विपक्षी नेताओं को प्लेन के नीचे बांध के ले जाएं'
सिंह ने यह भी कहा, "अगली बार जब भारत कोई कार्रवाई करे तो जो विपक्षी नेता प्रश्न उठाते हैं, उन्हें हवाई जहाज के नीचे बांध के ले जाएं। जब बम गिराया जाएगा तो उन्हें वहीं से टारगेट दिख जाएगा। इसके बाद उनको वहीं पर उतार दें। वे लोग टारगेट की जगहों को गिन लें और वापस आ जाएं।"
सिंह ने अपने ट्वीट पर कहा, "क्या आप मारे गए आतंकियों को गिन सकते हैं? बमों ने इमारतों को निशाना बनाया। क्या 1000 किलो बमों के धमाके से मौतें नहीं होंगी? अगर मौतें हुईं तो आप उसका अनुमान लगा सकते हैं। मुझे नहीं पता कि कौन इसकी गिनती कर सकता है। इस तरह की बातें करना दुर्भाग्यशाली है।"
पुलवामा हमला दुर्घटना है: दिग्विजय
दिग्विजय सिंह ने पुलवामा हमले को 'दुर्घटना' बताया। उन्होंने ट्वीट किया, ''एयर स्ट्राइक पर विदेशी मीडिया में संदेह पैदा किया जा रहा है, जिससे हमारी सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लग रहा है।'' इससे पहले दिग्विजय ने कहा था कि तकनीक के दौर में किसी कार्रवाई की तस्वीरें सैटेलाइट से मिल सकती हैं। लिहाजा सरकार को सबूत देना चाहिए। अमेरिका ने लादेन को मारने का सबूत पेश किया था।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को कहा, पुलवामा हमले में आतंकवादियों ने हमारे जवानों की नृशंस हत्या की। दिग्विजय आतंकी हमले को घटना बता रहे हैं, उनसे आप क्या उम्मीद करेंगे। ये वही हैं, जो जाकिर नाइक को मानवता की मूर्ति बताते हैं। ये वही हैं जो ओसामाजी और हाफिज सईद साहब कहते हैं।
प्रसाद ने कहा, ''राजनीति करने वालों को इतनी भी तमीज नहीं है कि जवानों की हत्या पर इस तरह से बयान न दें। दिल्ली में बाटला हाउस में दिल्ली के जवान मोहन शर्मा को मारा गया था। दिग्विजय आजमगढ़ गए थे और कहा था कि आतंकवादियों को सिर में गोली लगी थी। कांग्रेस के 10 साल मुख्यमंत्री रहे हैं, वह इस तरह के सवाल कर रहे हैं तो क्या कहा जाए?''
मध्यप्रदेश के मंत्री गोविंद सिंह ने कहा, "दिग्विजय ने जब भी कोई बात कही है, तो अभी कोई भले ही आलोचना करे, बात में वही बात सत्य निकलती है।"
'विपक्षी नेताओं को प्लेन के नीचे बांध के ले जाएं'
सिंह ने यह भी कहा, "अगली बार जब भारत कोई कार्रवाई करे तो जो विपक्षी नेता प्रश्न उठाते हैं, उन्हें हवाई जहाज के नीचे बांध के ले जाएं। जब बम गिराया जाएगा तो उन्हें वहीं से टारगेट दिख जाएगा। इसके बाद उनको वहीं पर उतार दें। वे लोग टारगेट की जगहों को गिन लें और वापस आ जाएं।"
सिंह ने अपने ट्वीट पर कहा, "क्या आप मारे गए आतंकियों को गिन सकते हैं? बमों ने इमारतों को निशाना बनाया। क्या 1000 किलो बमों के धमाके से मौतें नहीं होंगी? अगर मौतें हुईं तो आप उसका अनुमान लगा सकते हैं। मुझे नहीं पता कि कौन इसकी गिनती कर सकता है। इस तरह की बातें करना दुर्भाग्यशाली है।"
पुलवामा हमला दुर्घटना है: दिग्विजय
दिग्विजय सिंह ने पुलवामा हमले को 'दुर्घटना' बताया। उन्होंने ट्वीट किया, ''एयर स्ट्राइक पर विदेशी मीडिया में संदेह पैदा किया जा रहा है, जिससे हमारी सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लग रहा है।'' इससे पहले दिग्विजय ने कहा था कि तकनीक के दौर में किसी कार्रवाई की तस्वीरें सैटेलाइट से मिल सकती हैं। लिहाजा सरकार को सबूत देना चाहिए। अमेरिका ने लादेन को मारने का सबूत पेश किया था।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को कहा, पुलवामा हमले में आतंकवादियों ने हमारे जवानों की नृशंस हत्या की। दिग्विजय आतंकी हमले को घटना बता रहे हैं, उनसे आप क्या उम्मीद करेंगे। ये वही हैं, जो जाकिर नाइक को मानवता की मूर्ति बताते हैं। ये वही हैं जो ओसामाजी और हाफिज सईद साहब कहते हैं।
प्रसाद ने कहा, ''राजनीति करने वालों को इतनी भी तमीज नहीं है कि जवानों की हत्या पर इस तरह से बयान न दें। दिल्ली में बाटला हाउस में दिल्ली के जवान मोहन शर्मा को मारा गया था। दिग्विजय आजमगढ़ गए थे और कहा था कि आतंकवादियों को सिर में गोली लगी थी। कांग्रेस के 10 साल मुख्यमंत्री रहे हैं, वह इस तरह के सवाल कर रहे हैं तो क्या कहा जाए?''
मध्यप्रदेश के मंत्री गोविंद सिंह ने कहा, "दिग्विजय ने जब भी कोई बात कही है, तो अभी कोई भले ही आलोचना करे, बात में वही बात सत्य निकलती है।"
Monday, February 25, 2019
वायुसेना सूत्रों ने बताया, भारतीय विमानों ने कैसे किया LOC पार
भारतीय वायुसेना के सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि भारतीय वायुसेना के विमानों ने नियंत्रण रेखा पार करके कई निशानों पर हवाई हमले किए हैं.
वायुसेना के अधिकारियों ने बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित को इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार तड़के अंबाला से कई मिराज विमान उड़े और बिना अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन किए, निश्चित लक्ष्यों पर बम बरसाए.
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "देश की रक्षा के लिए बहुत ज़बरदस्त क़दम उठाया है सेना ने और सेना को इस तरह का क़दम उठाने की छूट प्रधानमंत्री मोदी जी ने दी थी. अब सेना के पीछे पूरा देश खड़ा है".
उन्होंने कहा, "पुलवामा में हमला करने वाले आतंकियों को 100 घंटे के भीतर मार गिराया गया, पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लिया गया, भारत के हिस्से का पानी पाकिस्तान को न देने का निर्णय लिया गया, उसके बाद अब यह कार्रवाई की गई है."
विमानों ने एलओसी को पार किया और नियंत्रण रेखा के नज़दीक बालाकोट नाम के एक क़स्बे पर बम गिराए.
वायु सेना के अधिकारियों ने बताया कि ये सारा अभियान आधे घंटे में पूरा हुआ. विमान तीन बजे तड़के उड़े और साढ़े तीन बजे तक सभी विमान सुरक्षित लौट आए.
इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने सुबह कहा था कि भारतीय वायुसेना ने भारत-पाक नियंत्रण रेखा (एलओसी) का उल्लंघन किया है और पाकिस्तान की सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वायुसेना को बधाई देते हुए ट्वीट किया है - "मैं भारतीय वायुसेना के पायलटों को सलाम करता हूँ."
पाक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्वीट किया कि मुज़फ़्फ़राबाद सेक्टर से भारतीय विमानों ने घुसपैठ की कोशिश की, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने त्वरित कार्रवाई की है.
उन्होंने ट्वीट किया, "भारतीय विमानों ने मुज़फ़्फ़राबाद सेक्टर से घुसपैठ की. पाकिस्तानी वायु सेना की तरफ़ से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की गई जिसके बाद वो भागने लगे."
"भागते हुए उन्होंने हड़बड़ा कर कुछ बम गिराए जो बालाकोट के नज़दीक गिरे. इसमें कोई नुक़सान या कोई हताहत नहीं हुआ है."
पाकिस्तान ने ये दावा ऐसे वक़्त में किया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच पुलवामा हमले को लेकर तनाव की स्थिति है.
14 फ़रवरी को हुए हमले के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सुरक्षाबलों को ख़ुली छूट दे दी गई है.
वहीं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा था कि अगर पाकिस्तान पर हमला होता है तो पाकिस्तान भी जवाबी कार्रवाई करेगा.
वायुसेना के अधिकारियों ने बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित को इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार तड़के अंबाला से कई मिराज विमान उड़े और बिना अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन किए, निश्चित लक्ष्यों पर बम बरसाए.
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "देश की रक्षा के लिए बहुत ज़बरदस्त क़दम उठाया है सेना ने और सेना को इस तरह का क़दम उठाने की छूट प्रधानमंत्री मोदी जी ने दी थी. अब सेना के पीछे पूरा देश खड़ा है".
उन्होंने कहा, "पुलवामा में हमला करने वाले आतंकियों को 100 घंटे के भीतर मार गिराया गया, पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लिया गया, भारत के हिस्से का पानी पाकिस्तान को न देने का निर्णय लिया गया, उसके बाद अब यह कार्रवाई की गई है."
विमानों ने एलओसी को पार किया और नियंत्रण रेखा के नज़दीक बालाकोट नाम के एक क़स्बे पर बम गिराए.
वायु सेना के अधिकारियों ने बताया कि ये सारा अभियान आधे घंटे में पूरा हुआ. विमान तीन बजे तड़के उड़े और साढ़े तीन बजे तक सभी विमान सुरक्षित लौट आए.
इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने सुबह कहा था कि भारतीय वायुसेना ने भारत-पाक नियंत्रण रेखा (एलओसी) का उल्लंघन किया है और पाकिस्तान की सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वायुसेना को बधाई देते हुए ट्वीट किया है - "मैं भारतीय वायुसेना के पायलटों को सलाम करता हूँ."
पाक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्वीट किया कि मुज़फ़्फ़राबाद सेक्टर से भारतीय विमानों ने घुसपैठ की कोशिश की, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने त्वरित कार्रवाई की है.
उन्होंने ट्वीट किया, "भारतीय विमानों ने मुज़फ़्फ़राबाद सेक्टर से घुसपैठ की. पाकिस्तानी वायु सेना की तरफ़ से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की गई जिसके बाद वो भागने लगे."
"भागते हुए उन्होंने हड़बड़ा कर कुछ बम गिराए जो बालाकोट के नज़दीक गिरे. इसमें कोई नुक़सान या कोई हताहत नहीं हुआ है."
पाकिस्तान ने ये दावा ऐसे वक़्त में किया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच पुलवामा हमले को लेकर तनाव की स्थिति है.
14 फ़रवरी को हुए हमले के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सुरक्षाबलों को ख़ुली छूट दे दी गई है.
वहीं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा था कि अगर पाकिस्तान पर हमला होता है तो पाकिस्तान भी जवाबी कार्रवाई करेगा.
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